Monday, 27 January 2014

♥ नज़रें झुका के ♥


नज़रें झुका के बैठे न रहो ,
राज़-ए-दिल यूँ छुपाये न रहो ,
दम निकलने को है मेरा , अब कुछ बोल भी दो ,
यूँ ज़ुबां तले इज़हार-ए-मोहब्बत दबाये न रहो !!

~ ♥ कल्प वर्मा ♥ ~ 

3 comments:

  1. बहुत खूब .. दम निकलने से पहले इज़हार हो जाए तो अच्छा है ...

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    1. shukriya shukriya...sahi kaha aapne...

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  2. VERY NICE PRESENTATION OF FEELINGS.

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